
राजनांदगांव : व्यक्ति जैसा अपने बारे में सोचता है वैसा ही उसका व्यक्तित्व बन जाता है…
राजनांदगांव , प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय व राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन माउंट आबू के सुरक्षा सेवा प्रभाग द्वारा देशभर के सुरक्षा सेवा बलों के लिए स्व-सशक्तिकरण से राष्ट्र सशक्तिकरण नामक विशेष जागरूकता, प्रेरणादायक अभियान किया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत 19 जून को राजनांदगांव जिले के विभिन्न सुरक्षा संस्थानों में पहुंच कर सुरक्षा बलों के जवानों को आत्म-सशक्तिकरण के महत्व से अवगत कराया। अभियान के दौरान पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय (पीटीएस), 8वीं बटालियन तथा आईटीबीपी डोंगरगढ़ पहुंचकर सुरक्षा बल के एक हजार से अधिक जवानों को संबोधित किया।
ब्रह्माकुमारीज के माउंट आबू से आए ब्रह्माकुमार शैलेन्द्र भाई ने कार्यक्रम में जवानों को संस्था का परिचय दिया। तनावमुक्त व संतुलित जीवन जीने के महत्वपूर्ण सूत्र साझा किए। कहा कि बढ़ते कार्यभार, प्रतिस्पर्धा और मानसिक दबाव के कारण तनाव एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में आध्यात्मिकता, सकारात्मक चिंतन और राजयोग ध्यान के माध्यम से मन को शांत एवं शक्तिशाली बनाया जा सकता है। ब्रह्माकुमार डॉ. पुरुषोत्तम भाई ने कहा कि व्यक्ति जैसा अपने बारे में सोचता है, वैसा ही उसका व्यक्तित्व और जीवन निर्माण होता है।
वक्ताओं ने स्वयं के प्रति सम्मानजनक एवं सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर दिया। कहा कि जब व्यक्ति अपने बारे में अच्छा सोचता है और अपनी शक्तियों पर विश्वास करता है, तब वह समाज और राष्ट्र के लिए अधिक प्रभावी योगदान देने में सक्षम बनता है। स्थानीय सेवा केंद्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी पुष्पा बहन ने सभी का स्वागत किया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी प्रभा बहन,ब्रह्माकुमारी सरिता बहन, ब्रह्माकुमारी पूजा बहन, ब्रह्माकुमार मुरलीधर सोमानीभाई , झालम भाई, मोरध्वज भाई, द्वारिका भाई, कमलेश भाई, रुपेश्वर भाई, लक्ष्मीकांत भाई सहित पीटीएस के बृजेश भदौरिया, 8वीं बटालियन से सेनानी नेहा पांडे, उप सेनानी गंगा उपाध्याय, उप सेनानी सारिका वैद्य, सहायक सेनानी भोई, बीएल ध्रुव, कंपनी कमांडर चंद्रहास गौतम, विजय कुमार ने भी विचार रखे।
सकारात्मक सोच से ही बढ़ाता है विश्वास ब्रह्माकुमार दीपक भाई ने बताया कि आत्म-सशक्तिकरण का प्रथम चरण अपने विचारों को सकारात्मक बनाना है। सकारात्मक सोच व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाती है तथा कठिन परिस्थितियों में भी उसे संतुलित और दृढ़ बनाए रखती है। साथ ही जवानों को अपनी आंतरिक शक्तियों, विशेषताओं और क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रेरित किया गया।

